चाहत है तेरी हद से ज्यादा
है मुहब्बत खुद से भी ज्यादा
जो न यकीं वफा का
दिल बदल कर देख ले
बेचैन होगा तू मुझसे ज्यादा
चाहत में तेरी हद से गुजर जायेगे
न हो दूरी एक पल की
हर धड़कन तेरे नाम कर जायेगे
होना ना कभी मुझसे जुदा
जीना होगा दुश्वार और
मर भी ना पायेंगे ।
दूरियाँ भी होती है खास
दूरियाॅ ही कराती है अहसास
अजनबी कब हो जाता है खास
दिल से आती है आवाज
अजनबी नही अजनबी वह
वो तो है दिल का करार
अजनबी नही वो है
सबसे खास ।
था कल चाँद बादल में
चांदनी के साथ
आज मगर लग रहा उदास
चमन में थी बहार ही बहार
आज मगर गुलशन भी वीरान
रास्ते थम से गये
तन्हाई से फिर भी आती है
उसकी आवाज
साथ होकर भी
ना साथ था इतना
दूर जाकर तड़पा
रहा जितना
हर शै हर मंजर उदास है
सबकी आँखो मे उसकी ही
प्यास है ।
याद इस कदर आती है
जिस्म से रूह को
बेजार किये जाती है।
खुली आँखे वीरान है
सांसे भी चल रही है
थम थम कर
कही रूक ना जाए धड़कन
रहकर मुझमे ही
क्यों सता रहे हो?
तुम ही बता दो
इतना याद क्यों
आ रहे हो ?
मन से मन का रिश्ता है ऐसा
जिस्म का रूह से रिश्ता है जैसा
धड़कन रूक गयी
तो दिल धड़क न पायेगा
छूट गया जो मन से
मन का साथ
जुदा होकर मन से
मन कहॉ जायेगा?
दूरियों की खाई हो
जितनी भी गहरी
मन का दरिया
मन के सागर में
ही समा जायेगा