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Wednesday, October 7, 2020
शब्द
कहने को ढाई अक्षर
पर सिमटा इनमें संसार है
शब्द नहीं शब्द मेरे
रूह की आवाज है
डूब जाऊ जो दुख के भंवर में
पार लगाए जो वो पतवार है
मेरी हंसी को जो दे खनक
वो थिरकता साज है
तेरी यादों को संभाला जिसने
वो आधार है
शब्द नहीं शब्द मेरे
जीने का आधार है।
2 comments:
विकास कुमार पाण्डेय
October 8, 2020 at 9:14 PM
सत्य...सुंदर रचना👍👍👍
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मन की मन से
October 11, 2020 at 9:59 PM
Thanks
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सत्य...सुंदर रचना👍👍👍
ReplyDeleteThanks
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