छोटी सी वो मुलाकात दिल में समा गई
दो पल का साथ प्यास बढ़ा गई।
खामोश थे लब मगर नज़रों ने बया कर दिया
पास होकर भी दूर रहे यही दिल दूरी दिल को सुलगा गई।।
कहना था बहुत कुछ मगर वक्त का साथ न मिला
घड़ी की टिक टिक बेचैनी बढ़ा गई।
पास थे फिर जैसे सदियों की दूरी थी
हाथों की अधूरी चाह हसरतों को दबा गई।।
न वादे थे न कसमें कोई
बस पलकों पर बात ठहर गई।
छूट गया साथ रह गई अधूरी आस
वो छोटी सी मुलाकात एक तड़प छोड़ गई।।