manjari

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Saturday, March 23, 2024

कहीं दूर चल

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 चल मन कही दूर चल जहां दिखे पूरा चांद जहां मिले खुला आसमान हो हवा निर्मल कल कल बहता हो  नदिया का जल। न हो काला जहरीला धुंआ जहां बस मुझे वही ...
Monday, March 4, 2024

क्यों

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 निभाना नही था जब वादा कोई झूठी कसमें क्यूं खाते हो? पास आए नही हम  और तुम छोड़ जाते हो? जाना था दूर तक मगर दो कदम पर साथ छोड़ जाते हो? नहीं...

बेचैन

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 चांद में चांदनी है जैसे फूलों में रंग है वैसे कोयल की कूक बरसात में जैसे। लगे सुहावन मन को ऐसे ठंड में सर्दी की धूप जैसे बेचैन हो तूभी कभी ...

उम्मीद

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 मंजिल वहीं है, पर रास्ते बदल गये। जाने कब उम्मीद के सूरज ढल गये। बंद कर ली है आंखे मगर सपनों में आना छूटा नही है । गहरी है चोट, गहरा असर है...
Sunday, November 19, 2023

तलब

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 चाहत थी जिसमे कभी डूब जाने की    है तलब उस किनारे से दूर जाने की।    जिस चेहरे से हटती नही थी निगाहें     कोशिश है उस चेहरे को भूल जाने की।...
Friday, November 10, 2023

चलते जाना

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 माना नामुमकिन है वक्त को रोक पाना बहते समय की धार को कहीं मोड़ पाना। करें उदास जब जिंदगी की राहें कुछ देर ठहरना, बचपन में खो जाना, वो रूठना...
Friday, October 27, 2023

कुछ नया

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   चलो जिंदगी ये नया करते हैं। बेवफा को यादों से रिहा करते हैं। जो खुश हैं हमारे बिना  उनको, अपनी यादों से जुदा करते हैं। गैरों से कर ली मोह...
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