हंसी से उसकी
मोती बिखर जाये
लबों की पखुंडियो से
गुलाब भी शरमा जाये
निगाहों में कशिश ऐसी
जो होश भुलाए
अदाओं के जादू से
इंसान क्या
फरिश्ते भी ना बच पाये
कैसे करूँ तेरे हुस्न की तारीफ
कि अल्फाज ही कम पड़ जाये ।
मोती बिखर जाये
लबों की पखुंडियो से
गुलाब भी शरमा जाये
निगाहों में कशिश ऐसी
जो होश भुलाए
अदाओं के जादू से
इंसान क्या
फरिश्ते भी ना बच पाये
कैसे करूँ तेरे हुस्न की तारीफ
कि अल्फाज ही कम पड़ जाये ।
Very Good line written
ReplyDeleteGood 👌
ReplyDeleteलबों की पखुंडियो से
ReplyDeleteगुलाब भी शरमा जाये
वाह क्या बात है.....
Lovely lines
ReplyDeleteLovely lines
ReplyDeleteLovely lines
ReplyDeleteLovely lines
ReplyDeleteआँखे झीलों की तरह होंठ गुलाबो जैसे..
ReplyDeleteअब भी होते है कई लोग किताबो जैसे..