Sunday, June 2, 2019

आफरीन

हंसी  से उसकी
मोती बिखर  जाये
लबों की पखुंडियो से
गुलाब भी शरमा जाये
निगाहों में कशिश ऐसी
जो होश भुलाए
अदाओं के जादू  से
इंसान क्या
फरिश्ते भी ना  बच पाये
कैसे करूँ तेरे हुस्न की तारीफ
कि अल्फाज ही कम पड़ जाये ।


8 comments:

  1. लबों की पखुंडियो से
    गुलाब भी शरमा जाये



    वाह क्या बात है.....

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  2. आँखे झीलों की तरह होंठ गुलाबो जैसे..
    अब भी होते है कई लोग किताबो जैसे..

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