Monday, November 11, 2019

फतह

टूट कर जो संवर गई
 वह चट्टान हूं
तप कर  बना जो
वह सोने का हार हूं
टूट कर डाली से भी
खिल गया जो
वह गुलाब हूं
हर चोट से मजबूत बने जो
वह फौलाद हूं
हजारों मील तय  करके
मिले जो सागर में
वह नदी की धार हूं
दर्द में डूब कर
लिखे जो शायरी
वो कलम की धार हूं
हैरान ना हो ए जिंदगी
तेरे हर दर्द को
हथियार बना कर
तुझसे हर जंग फतह
को तैयार हूं

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