Saturday, February 1, 2020

सहारा

देखा था कल जिन पेड़ो को इठलाते हुए
पड़े आंधी से आज जमी पर खुद पर सवाल उठाते हुए
भरोसा था जिन दीवारों पर
देखा उन्हें भी वक़्त की आंधी से ढह जाते हुए
लहरों को नाज़ था जिस मांझी पर
देखा उन्हें भी नाव डुबाते हुए
था दुश्वार जिनके बिना
देखा उन्हें भी दूर जाते हुए
इंसानों की बात क्या?
देखा साया भी छोड़ जाते हुए
बीत ना जाए उम्र यूं ही सहारा तलाशते हुए
देखा है सहारे  को सहारा तलाशते हुए
बिछ जाएंगे राहों में फूल ही फूल
कांटे हटाते हुए
मिलेगी मंज़िल सहारे से दूर
मेहनत से भाग्य बनाते हुए।


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