है साथ चलते मगर हम सफर नहीं
बाहों में जिस्म मेरा पर ख्वाबों में हम नहीं
है साथ साथ पर फासले भी कम नहीं
लबों पे मेरे उस के ही तराने
पर उसके लबों पर मेरी जुंबिश तक नहीं
वह मेरे हर पल में आज में कल में
हम आज में भी नहीं
रूह तक समा गया है जो
हम उसकी बातों में भी नहीं
रातें गुजरती याद में जिसकी
सोता वो चैन से बाहों में कहीं
कहता था मुझसे ना तुझसे पहले ना तेरे बाद कोई
गुम हो गया है आज वो पुरानी गलियों में कहीं
हर सितम के बाद कहता है मासूमियत से
तेरे गुनहगार हम नहीं।
बाहों में जिस्म मेरा पर ख्वाबों में हम नहीं
है साथ साथ पर फासले भी कम नहीं
लबों पे मेरे उस के ही तराने
पर उसके लबों पर मेरी जुंबिश तक नहीं
वह मेरे हर पल में आज में कल में
हम आज में भी नहीं
रूह तक समा गया है जो
हम उसकी बातों में भी नहीं
रातें गुजरती याद में जिसकी
सोता वो चैन से बाहों में कहीं
कहता था मुझसे ना तुझसे पहले ना तेरे बाद कोई
गुम हो गया है आज वो पुरानी गलियों में कहीं
हर सितम के बाद कहता है मासूमियत से
तेरे गुनहगार हम नहीं।
Waaaah kya baat
ReplyDeleteभावपूर्ण💐
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