उतर धारा पर देती जीवन का वरदान
पुण्यसलिला भागीरथी नाम महान
धोकर तन मन का मैल करती निर्मल
देवो से पूजित है गंगाजल
देती सबको जीवन का आधार
मां कहकर इंसान करता उसकी शुचिता पर प्रहार
तन धोया मन का मैल धो ना पाया
पाकर कर्मो का फल फिर भी समझ न पाया
जीवनदायिनी है जो जीवन का आधार
दूषित किया उसे लगा गंदगी का अंबार
किया प्रकृति से खिलवाड़
हिल गई दुनिया आया करोना काल
काटकर छीना जिनसे जीवन
मांगते अब उन्हीं से सांसे उधार
खोकर भी जीवन ना सुधरा उसका मन
महामारी में जो कुछ कर न पाया
बहाकर लाशे गंगा में संकट और बढ़ाया
बिलखती है गंगा देख विनाश की लीला
बच्चो ने ही मां की पवित्रता को छीना
खत्म हो गए जो जल,वायु, तो कैसे जी पाएगा?
मानवता की हत्या का पाप कौन उठाएगा?
भावी पीढ़ी को क्या यही सौगात दे जायेगा?
जीना है फिर से तो इंसानियत सीखो
पेड़, पौधे, हवा, धरा,सब को सिंचो
जो प्रकृति की गोद में जायेगा
आरोग्यता का वरदान वही पाएगा।
माँ गंगा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संदेश👍👍
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