Sunday, May 23, 2021

बिलखती गंगा

 उतर धारा पर देती जीवन का वरदान

पुण्यसलिला भागीरथी नाम महान

धोकर तन मन का मैल करती निर्मल

देवो से पूजित है गंगाजल

देती सबको जीवन का आधार

मां कहकर इंसान करता उसकी शुचिता पर प्रहार

तन धोया मन का मैल धो ना पाया 

पाकर कर्मो का फल फिर भी समझ न पाया

जीवनदायिनी है जो जीवन का आधार

दूषित किया उसे लगा गंदगी का अंबार

किया प्रकृति से खिलवाड़

हिल गई दुनिया आया करोना काल

काटकर छीना जिनसे जीवन

मांगते अब उन्हीं से सांसे उधार

खोकर भी जीवन ना सुधरा उसका मन

महामारी में जो कुछ कर न पाया

बहाकर लाशे गंगा में संकट और बढ़ाया

बिलखती है गंगा देख विनाश की लीला

बच्चो ने ही मां की पवित्रता को छीना

खत्म हो गए जो जल,वायु, तो कैसे जी पाएगा?

मानवता की हत्या का पाप कौन उठाएगा?

भावी पीढ़ी को क्या यही सौगात दे जायेगा?

जीना है फिर से तो इंसानियत सीखो

पेड़, पौधे, हवा, धरा,सब को सिंचो

जो प्रकृति की गोद में जायेगा

आरोग्यता का वरदान वही पाएगा।

1 comment:

  1. माँ गंगा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संदेश👍👍

    ReplyDelete

काश

  ​नन्ही आँखों में थी सपनों की ऊँची उड़ान - प्यारी थी  ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान ​थी हर कदम पर मुश्किले पर दिल को था एहसास, बदलेगी  दु...