आंखो से दिल में उतर आया कोई ,
पता नहीं कब ,धड़कनों में समाया कोई।
हो रहा यू असर उसका,
ना रहा मुझ में कुछ मुझ जैसा।।
लिखती हूँ मै, लिखवाता है वो,
गाती हूँ मै, गीत बन जाता है वो।
आंखे खुली हो या बंद ,
हर वक्त नजर आता है वो।।
बातें मेरी ,शब्द बन जाता है वो,
हो गई हूँ उसमे इस कदर मगन,
कि मुझसे मुझे चुराता है वो ।
बिना चाहे सोचूं जिसे दिन रात,
इस कदर बेकरार कर जाता है वो,
आंखो से दिल में उतर जाता है वो।।
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