सपनों में पास बुलाते हैं, सामने से नजर चुराते हैं।
निहारते हैं वह उन राहों को जिनसे हम आते जाते हैं।
टकरा जाएँ राहों में तो राह बदल के जाते हैं।
जाने क्यों अन्दर ही अन्दर से बेचैन हो जाते हैं।
हाल ए दिल पूछो तो हर बार टाल जाते हैं।
खोलना चाहें दिल के राज मगर जाने क्यों घबराते है?
भावनाओं के समंदर में हमें वे डुबा जाते हैं।
हमको देखकर परेशान दूर से मुस्कुराते हैं।
बढ़ जाती है जो उलझन फिर हम कलम उठाते हैं।
दर्द ए दिल लफ़्ज़ों में लिखकर बताते हैं।
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