Tuesday, January 6, 2026

अनजाना रिश्ता

 ना है वो अपना ना पराया

 रिश्ते का कोई नाम नहीं 

  बस रिश्ता है अनजना

    

  झुकी नजरों से मुझे देखना

   सामने से नजर बचाना

    ना मिले तो ढूंढे बहाना।

  

     मिल कर भी हाल ए दिल छुपाना

     याद  है उसका ज़ख्म पर मरहम लगाना।


      चांद के बहाने दरिया किनारे मुझे निहार जाना

        सर्दियों की उन रातों में बस यूं ही कुछ दूर साथ जाना।


          हक़ीक़त हैं नहीं कोई अफसाना

          बस रिश्ते का नाम है अनजाना।

          है जो अपनो से भी खास

          सपनों से भी प्यारा।।

           


      

       

खाकी

 सिर्फ एक रंग नहीं है खाकी रंगों की शान है खाकी।

 जिसे पहन खड़ा हर सिपाही  रहता बलिदान को तैयार है।

  धूप, आंधी, भयंकर मौसम

 सीना तान चलता, पहन खाकी जो चलता है।

  न नींद से यारी,  आराम भी हराम है।

  सीमा हो या गालियां  खाकी हर जगह तैनात है।

   न्याय, कर्त्तव्य साहस का चलता फिरता पाठ है।

   मां की ममता, पत्नी का इंतजार  बच्चों की हंसी छूट जाती,

    पहन के खाकी हर चाहत पीछे रह जाती।

     सलाम है उस खाकी को जो चुपचाप सब सहती है

      हम सो पाते सुरक्षित क्योंकि खाकी  जगती है।।



Friday, January 2, 2026

ऐसा न हुआ

 हमने चाहा बहुत संभल जाना 

  पर हर बार ऐसा न हुआ।

  दर्द को शब्दों में ढाल लिया 

   मगर असर वैसा न हुआ।

    वो कहते थे लौट आयेंगे एक दिन 

     साल बदले मगर ऐसा न हुआ।

     हमने चाहा बस याद न आए कोई 

      दिल का ये इम्तिहान ऐसा नहीं हुआ।

       दर्द ने लिखना सिखा दिया 

        क्योंकि चुप रहना मुमकिन न हुआ।।