Tuesday, January 6, 2026

अनजाना रिश्ता

 ना है वो अपना ना पराया

 रिश्ते का कोई नाम नहीं 

  बस रिश्ता है अनजना

    

  झुकी नजरों से मुझे देखना

   सामने से नजर बचाना

    ना मिले तो ढूंढे बहाना।

  

     मिल कर भी हाल ए दिल छुपाना

     याद  है उसका ज़ख्म पर मरहम लगाना।


      चांद के बहाने दरिया किनारे मुझे निहार जाना

        सर्दियों की उन रातों में बस यूं ही कुछ दूर साथ जाना।


          हक़ीक़त हैं नहीं कोई अफसाना

          बस रिश्ते का नाम है अनजाना।

          है जो अपनो से भी खास

          सपनों से भी प्यारा।।

           


      

       

2 comments:

  1. आप का लेखन भावप्रवण और अपना सा लगता है।

    ReplyDelete