Sunday, August 23, 2026

काश

 


​नन्ही आँखों में थी सपनों की

ऊँची उड़ान -

प्यारी थी  ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान

​थी हर कदम पर मुश्किले

पर दिल को था एहसास,

बदलेगी  दुनिया एक दिन -

बदलेंगे हालात।

​पार कर हर चुनौती -

पाई सपनों की ऊँची उड़ान,

पाकर कुछ,  सब

खोने का दर्द - टीसता 

है आज।

​खो गई बेफ़िक्री, दूर हुई हँसी

चंद सिक्कों से मुट्ठी में दुनिया।

​पाने की खुशी -

फीकी हुई त्योहारों की चमक,

रौशन नहीं करती कोई रौनक

कुछ पाने की चाह, जीत जाने का उत्साह।

​पाकर कुछ खोने का डर -

चलते-चलते गिर जाने का डर क्यों है?

​हर वक्त होता है एहसास -

थम जाय समय का पहिया -

लौट आता गुज़रा ज़माना -

काश!


Tuesday, August 4, 2026

उम्मीद का चिराग़

 

ग़म की धूप में भी जिसने मुस्कुराना सीख लिया,

ज़िम्मेदारियों के बोझ में भी कदम बढ़ाना सीख लिया।

​पिता का साया उठा, फिर माँ पर भी आई आँच,

हर दर्द को सीने में उसने छुपाना सीख लिया।

​बचपन की गरीबी थी, फिर खुशियों पर ग्रहण लगा,

टूटे सपनों से भी नया आशियाना बनाना सीख लिया।

​खो गई बेफ़िक्री, छूट गया वो फोटोग्राफी का शगल,

उसने हर मोड़ पर हालात से टकराना सीख लिया।

​छीन ली ज़माने ने उसकी मासूमियत, वो हँसी,

पर उम्मीद के धागे से ख़ुद को पिरोना सीख लिया।

​नाज़ुक हाथों में कलम है, दिल में है बुलंद हौसला,

उसने हर स्याही से अपना मुक़द्दर सजाना सीख लिया।

​यकीन है उसे, बदलेगी ये फ़िज़ा, बीतेगी ये रात,

अंधेरों की राहों में उसने चिराग़ जलाना सीख लिया।