Sunday, August 23, 2026

काश

 


​नन्ही आँखों में थी सपनों की

ऊँची उड़ान -

प्यारी थी  ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान

​थी हर कदम पर मुश्किले

पर दिल को था एहसास,

बदलेगी  दुनिया एक दिन -

बदलेंगे हालात।

​पार कर हर चुनौती -

पाई सपनों की ऊँची उड़ान,

पाकर कुछ,  सब

खोने का दर्द - टीसता 

है आज।

​खो गई बेफ़िक्री, दूर हुई हँसी

चंद सिक्कों से मुट्ठी में दुनिया।

​पाने की खुशी -

फीकी हुई त्योहारों की चमक,

रौशन नहीं करती कोई रौनक

कुछ पाने की चाह, जीत जाने का उत्साह।

​पाकर कुछ खोने का डर -

चलते-चलते गिर जाने का डर क्यों है?

​हर वक्त होता है एहसास -

थम जाय समय का पहिया -

लौट आता गुज़रा ज़माना -

काश!


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