जिसने माँ जैसा दुलार दिया
हरी भरी छाया से
जीवन संवार दिया
उस माँ के आँचल को
छलनी कर जाते है
बिन सोचे पेड़ काटे जाते है
बेमोल जिदंगी दिए जाती है
उस हवा में भी जहर घुल जाती है
गर ना होती नदिया
फिर प्यास कौन बुझाता?
नादान इंसान फिर भी
समझ न पाता
मैला करेंगे जो इनको
जीवन का आधार
बनायेंगे किसको
है जो खुद से प्यार
बंद करो प्रदूषण की रफ्तार
चलो वृक्ष लगाए दो चार
वृक्ष है धरा का श्रृंगार ।
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