Wednesday, June 5, 2019

पुकार






Wednesday, June 5, 2019


पुकार

जिसने  माँ जैसा दुलार दिया
हरी भरी छाया से
जीवन संवार दिया
उस माँ के आँचल को
छलनी कर जाते है
बिन सोचे पेड़ काटे जाते है
बेमोल जिदंगी दिए जाती है
उस  हवा में भी जहर घुल जाती है
गर ना होती  नदिया
फिर प्यास  कौन बुझाता?
नादान इंसान फिर भी
समझ न पाता
मैला करेंगे जो इनको
जीवन का आधार
बनायेंगे किसको
है जो  खुद से प्यार
बंद करो प्रदूषण की रफ्तार
चलो वृक्ष  लगाए दो चार
वृक्ष  है धरा का श्रृंगार ।


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