नन्ही आँखों में थी सपनों की
ऊँची उड़ान -
प्यारी थी ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान
थी हर कदम पर मुश्किले
पर दिल को था एहसास,
बदलेगी दुनिया एक दिन -
बदलेंगे हालात।
पार कर हर चुनौती -
पाई सपनों की ऊँची उड़ान,
पाकर कुछ, सब
खोने का दर्द - टीसता
है आज।
खो गई बेफ़िक्री, दूर हुई हँसी
चंद सिक्कों से मुट्ठी में दुनिया।
पाने की खुशी -
फीकी हुई त्योहारों की चमक,
रौशन नहीं करती कोई रौनक
कुछ पाने की चाह, जीत जाने का उत्साह।
पाकर कुछ खोने का डर -
चलते-चलते गिर जाने का डर क्यों है?
हर वक्त होता है एहसास -
थम जाय समय का पहिया -
लौट आता गुज़रा ज़माना -
काश!
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