हे त्रिपुरारी सुन लो अरज हमारी
आई है दुखियारी शरण तिहारी
हे महाकाल हे स्वामी
तेरी महिमा न्यारी
आई है दुखियारी शरण तिहारी
हर लो रोग संताप
दो आरोग्य करो निष्पाप
हर लो अज्ञान शोक अंधियारा
खुशी हो हर घर मुस्कुराए जग सारा
जूझ रहा विफलताओं से मन
दिखा दो राह सूरज बन
हे कैलाश के वासी
सुन लो अरज हमारी।
आई है दुखियारी शरण तिहारी
सुन्दर रचना
ReplyDeleteभावप्रवण रचना🙏
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