Wednesday, March 10, 2021

अरज

 हे त्रिपुरारी सुन लो अरज हमारी

आई है दुखियारी शरण तिहारी

हे महाकाल हे स्वामी

तेरी महिमा न्यारी

आई है दुखियारी शरण तिहारी

हर लो रोग संताप

दो आरोग्य करो निष्पाप

हर लो अज्ञान शोक अंधियारा

खुशी हो हर घर मुस्कुराए जग सारा

जूझ रहा विफलताओं से मन 

दिखा दो राह सूरज बन

हे कैलाश के वासी

सुन लो अरज हमारी।

आई है दुखियारी शरण तिहारी


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