हमने चाहा बहुत संभल जाना
पर हर बार ऐसा न हुआ।
दर्द को शब्दों में ढाल लिया
मगर असर वैसा न हुआ।
वो कहते थे लौट आयेंगे एक दिन
साल बदले मगर ऐसा न हुआ।
हमने चाहा बस याद न आए कोई
दिल का ये इम्तिहान ऐसा नहीं हुआ।
दर्द ने लिखना सिखा दिया
क्योंकि चुप रहना मुमकिन न हुआ।।
वाह अति सुन्दर कविता
ReplyDeleteThank you Tiwari ji
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