Monday, November 18, 2019

अस्तित्व

चाय में डूबे बिस्किट को देखकर
ये ख्याल  आया
डूब जाओ गर  किसी में
वजूद किस कदर बिखर जाता है
डूबने का घर शौक है तुझे
तो खुद में डूब जाओ
गर खुदा ना मिले
शायद खुद को ढूंढ पाओ
नदिया भी डूबकर सागर में
वजूद खो देती है
गर हुए खुद से जुदा
दुनिया भी जीने कहां देती है
जलने का है गर  शौक तुझे
 तो सूरज बन जाओ
रोशन कर खुद को
जहां को चमकाओ।

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काश

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