माना कि विफलता
दिल तोड़ जाती है
मगर विफलता ही तो
सफलता की राह दिखाती है।
मुश्किलें राह भटकाती है
मगर मुश्किलों के पार ही
मंजिल मिल पाती है।
घोर निराशा में गम के
गहराते बादल जो बरस जाते हैं
चीर कर निराशा की नीरवता
आसमानी उजाले का पट
झट से खोल जाते हैं।
ना उम्मीदी जब मायूस करे
ना उम्मीदी ही फिर फिर
उम्मीद का फूल खिलाती है
जो हो हौसला बुलंद तभी तो
नन्ही चींटी पहाड़ चड़ जाती है।
सुन्दर रचना
ReplyDeleteना उम्मीदी ही उम्मीदों का फूल खिलाती है....
ReplyDeleteवाह वाह क्या बात है......
बहुत सुंदर रचना है इसके लिए आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं लेखन कार्य जारी रहे मंजिल एक दिन तो अवश्य मिलेगी
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