उर्दू आती नहीं ना हिंदी का ज्ञान है
कहती हूं मन की बात बस मेरे भाव है
कता का पता नहीं मिसरा अंजान है
आता नहीं समझ भाव में
मीटर का क्या काम है?
आती नहीं साहित्य की वर्णमाला
मन मेरा नादान है
मन को भाती मन की बात
उड़ता पंछी मन मेरा
बंदिशों से अंजान है।
नन्ही आँखों में थी सपनों की ऊँची उड़ान - प्यारी थी ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान थी हर कदम पर मुश्किले पर दिल को था एहसास, बदलेगी दु...
बहुत सही बात कही आपने और साफ़गोई के साथ कही अच्छा लगा।
ReplyDeleteमहेंद्र अलंकार
Kavya me bhaw Paksha hi mahatwapoorna hota hai !
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