Tuesday, February 9, 2021

मन की बात

 उर्दू आती नहीं ना हिंदी का ज्ञान है

कहती हूं मन की बात बस मेरे भाव है

कता का पता नहीं मिसरा अंजान है

आता नहीं समझ  भाव में

मीटर का क्या काम है?

आती नहीं साहित्य की वर्णमाला

मन मेरा  नादान है

मन को भाती मन की बात

उड़ता पंछी मन मेरा

बंदिशों से अंजान है।




2 comments:

  1. बहुत सही बात कही आपने और साफ़गोई के साथ कही अच्छा लगा।
    महेंद्र अलंकार

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  2. Kavya me bhaw Paksha hi mahatwapoorna hota hai !

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