Wednesday, May 18, 2022

हम नहीं


जानती हूं बसता जो तेरी नजर में
वह प्यार हम नहीं।

बेरुखी की तपिश  से सुख जाए 
वो गुलाब हम नहीं।

सुखा लिया है हमने अब आंसुओं को अपने
बिखर के जो टूट जाए
वो कांच हम नहीं।

निखारा जिस गुलशन को
प्यार के फूलों से
हो गए रुखसत बहारों के हकदार हम नहीं।

छला है खुद ही खुद को प्यार के नाम पर
कैसे कहे  खता नही, गुनहगार हम नहीं।

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