बरसती हैं बूँदें इस तरह हिल मिल।
संभालूँ दिल को कैसे, है बड़ी मुश्किल।
है वो मुझसे दूर, मुझसे बेखबर अनजान।
पर दिल को हरपल रहता है फिर भी गुमान।
जैसे छुपकर कह रहा हो यही कहीं से,
आ मिल जा मुझसे जैसे मिलतीं बूंदे जमीं से।
झूमता है दिल ऐसे जैसे बारिश में नवकोपल।
मिलेंगे दो दिल ऐसे जब आएगा वो पल।
बिजली संग उसकी छवि चमकती है रह रह कर,
बस गया दिल में वो मेरा हमसफ़र बन कर।
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