Friday, July 31, 2026

एक सवाल

 

तुमने कहा था—"लिखो, मुझे पढ़ना है..."

पर मैं लिखूँ, तो क्या तुम समझ पाओगे मेरे हालात को?

खुद में सिमटे  मेरे जज्बात को?

​मेरे हर दिन, मेरी हर तन्हा रात को?

कुछ कही, कुछ अनकही बात को?

​हर बार टूटकर जुड़ने के मेरे प्रयास को?

राह तकती मेरी आँखों के बेबस इंतज़ार को?

भीगी आँखों से ज़िन्दगी की डोर थामे, मेरे हाथों के कमाल को?

​बोलो... पढ़ तो लोगे मेरे लिखे को,

पर क्या बदल भी पाओगे मेरे हालात को?

1 comment:

  1. वाह “बोलो, पढ़ तो लोगे”

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