बिजली चमके, मन तरसे
बादल कड़के , दिल धड़के
अनकही चाहत से दिल मचले
बाहर बादल बरसे
अंदर दो नैना तरसे
जाने कब हो ऐसी बरसात
भींगने का मिले सौगात
भींगे तन मन हर्षे
हौले हौले जब बरसे
बीते साल दर साल
नहीं भींगी, है ये मलाल
होगी उनसे मुलाकात
जाने कब होगी वो बरसात?
No comments:
Post a Comment