जमाने बाद याद आया कोई ,
अधूरी खुशियाँ मुकम्मल दर्द लाया कोई।
जमाने बाद याद आया कोई,
साथ देने का वादा कर , हुआ पराया कोई।।
वापस ना कर सकी,जो सौगात लाया कोई,
दफन कर दिया जिस दर्द को,
आंखो से वो दर्द बहाया कोई।
है ये कौन सी कशिश उसके लिए?
ना रहा जिससे अब रिश्ता कोई,
जमाने बाद याद आया कोई।
याद आता है जो मुद्दतों बाद भी,
कैसे कह दूं मेरा उससे रिश्ता नहीं
A beautiful lines , nice kavita , do well more
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