Wednesday, April 1, 2026

अधूरी हसरत


गले लगने की हसरत दिल के कोने में दबाई है,

मगर अफ़सोस, आज फिर बीच में तन्हाई है।

तसव्वुर में  तो रोज़ तुम्हें बाँहो में भरते हैं,

हक़ीक़त में मगर यादों की एक लंबी परछाई है।

हवा का झोंका जब गुज़रता है मेरे पास से,

लगता है जैसे तुमने चुपके से छुअन पहुँचाई है।

वो जो एक सुकून मिलता था तुम्हारी बाँहों में,

उसकी तलाश में मैंने अपनी नींद गँवाई है।

मिले जो मौका कभी, तो जी भर के लिपट जाऊँ,

अभी तो बस ख्यालों में तुम्हारी सूरत समाई है।

2 comments:

  1. प्रेम की आस दिल में समाई रही
    वो न आए मोहब्बत बुलाती रही
    अब के आओ दिल में बसा लेंगे हम
    जा न पाओगे सबसे छुपा लेंगे हम!!

    ReplyDelete

काश

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