Thursday, April 2, 2026

जिद

 मिले न चैन तुमको भी, ये ऐसी बेकरारी है,

तुम्हें पागल बनाने की अब मेरी जिद जारी है।

मेरी नजरों के घेरे से तुम बचकर जा न पाओगे,

तुम्हारी हर धड़कन पर अब हुकूमत मेरी भारी है।

मैं अपने अक्स को तेरी ही आँखों में सजाऊँगी,

तुझे अपना दीवाना करने की ये मुकम्मल तैयारी है।

खयालों में भी बस मेरी ही सूरत याद आएगी,

मोहब्बत में ये मेरी जीत, और तेरी हार प्यारी है।

मिटा दूँगी वो हर दूरी जो तेरे-मेरे बीच आए,

ये "मन" की जिद है जानम, जो सब पर अब भारी है।

2 comments:

  1. मंजरी जी, बहुत भावपूर्ण लेखन है। निरंतर जारी रखिए। बहुत बहुत शुभकामनाएं!

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