मिले जो साथ तेरा, मैं मुकम्मल हो जाऊं,
तेरी बाँहों में सिमट कर, मुसलसल हो जाऊं।
मेरे सूखे हुए होंठों पे तेरी बातों की मिश्री हो,
तू जो छेड़े मुझे, तो मैं ग़ज़ल हो जाऊं।
दुनिया की नज़रों से छुपा कर रखूँ तुझे ऐसे,
तू मेरा आईना बने और मैं तेरा अक्स हो जाऊं।
बड़ी बेचैन रहती है ये धड़कन तेरे बिन अक्सर,
तू थाम ले जो हाथ, तो मैं पल में बहल जाऊं।
महक उठती है मेरी रूह बस तेरे तसव्वुर से,
तू हकीकत में आए, तो मैं ख़ुशबू बन बिखर जाऊं।
आपकी लेखनी में निखार आ रहा है। मंजिल करीब आ रही है। प्रयास जारी रहे। शुभकामनाएं!!
ReplyDeleteThank u sir
ReplyDelete