Monday, June 29, 2020

बरसात

हो रही है बरसात अंदर भी बाहर भी
भिंगा रही है बौछार तन भी मन भी
मद्धम है सांसे है आंख भी नम
पढ़ ना  सकी चेहरे ये कमी नहीं है कम
उठती थी उमंगे खिलता था मन
लेकर सवाल बहुत आया इस बार बारिश का मौसम
बूंदे जो लाती थी तन मन में सिहरन
बहती है आज आंखों से नमी बन
बूंदों की फुहार से खिल उठा था बचपन
अनछुए बूंदों की ताजगी चुरा गया यौवन
आता है मन में सवाल रह रह कर
क्या पाया बचपन खोकर?
बस एक था ख्वाब जो रह गया सपना बनकर
दिखा गई  हकीकत जिंदगी आईना बनकर।
 


Saturday, May 23, 2020

पुनर्निर्माण

चहुं ओर  पसरा सन्नाटा , अजब सी है शांति
हैरान है इंसान प्रसन्न है प्रकृति
वर्षो से धरती की तड़प अब ले रही  करवट
काटकर जंगल जिनसे छीना ठिकाना
सूनी राहों पर अब उनका है आशियाना
भुगत रहा इंसान लालच का खामियाजा
बंद हो गए हत्या,लूट सब अपराध है
बंद हुआ इंसान घरों में प्रकृति कर रही पुनर्निर्माण है
है समय कठिन पर डरो ना ये करो ना काल है
विनाश के साथ ही  नव सृजन का काल है
बन जाओ इंसान फिर ये सबक महान है
छोड़ो लालच, अभिमान मोह माया
यही सिखाने करोना धरती पर आया
माना  आपदा बहुत  विकराल है
आपदाओं में संभले, संवरे वहीं इंसान है।





Monday, April 27, 2020

अर्पण

शब्दों के मोती से
मन का खजाना खोलती हूं
तेरी रचना तुझको सौंपती हूं
सांसों के हर धागे से
प्रीत की चादर बुनती हूं
मोल नहीं जिसका कोई
बेमोल अर्पित करती हूं
पलकों के चिलमन में
तेरी यादें बसा के रखती हूं
तू आए या ना आए
रोज तेरा रास्ता निहारती हूं
रोकती  हूं मचलते कदमों को
ना हो तू रुसवा कहीं जमाने में
हर रोज मर के जीती हूं
मिल जाए शायद मन से मन कभी
इस आस में हर सांस संभाले रहती हूं
मिल जाए दिल को सुकून जरा
हर वक्त तेरी तस्वीर सीने से लगाए रखती हूं।


Friday, April 10, 2020

अधूरा साथ

है साथ चलते मगर  हम सफर नहीं
बाहों में जिस्म  मेरा पर ख्वाबों में हम नहीं
है साथ साथ पर फासले भी कम नहीं
लबों पे मेरे उस के  ही तराने
पर उसके लबों पर मेरी जुंबिश तक नहीं
वह मेरे हर पल में आज में  कल में
हम आज  में भी नहीं
रूह  तक समा गया है जो
हम उसकी बातों में भी नहीं
रातें गुजरती याद में जिसकी
सोता वो  चैन से बाहों में कहीं
कहता था मुझसे ना तुझसे  पहले ना तेरे बाद कोई
गुम हो गया है आज वो पुरानी गलियों में कहीं
हर सितम के बाद कहता है मासूमियत से
तेरे गुनहगार हम नहीं।

Thursday, April 2, 2020

तुम

हर ख्वाब में तुम हो
हर सांस में तुम हो
हर मुस्कान में तुम हो
आंसू की हर बूंद में तुम हो
मेरी हर सुबह हर शाम में तुम हो
मेरे कल में तुम हो
मेरे आज में तुम हो
हो हर जगह तुम ही तुम
बस हाथों की लकीरों में तुम नहीं हो।

Tuesday, March 31, 2020

आस

न बन पाए सूरज तो गम नहीं
उजाले के लिए दिया भी कम नहीं
जो ना भर पाए ऊंची उड़ान
उड़ने का हौसला भी कम नहीं
चाहे जिन्दगी में दिन हो चार
हर दिन में हो कुछ खास
बस इतनी है आस
रहूं दिलों में जाने के बाद
चुरा लूं आंसू
और हो लबों पे मुस्कान
मेरे नाम के साथ।

Monday, March 16, 2020

पहचान

मोम से होते है कुछ लोग
जला कर उन्हें रोशन होते है लोग
खेल कर दिलों से
दिल बहलाते है लोग
छीनकर जरूरत शौक पालते है लोग
पड़ गई जो कम शराब
आसुओं से भी महफ़िल सजाते है लोग
खिलौनों से दिल ना भरे
तो दिलों से भी खेल जाते है लोग
औरो की क़ीमत करेंगे क्या वो लोग?
गैरों की बात क्या खुद को ना पहचान पाए जो लोग।

काश

  ​नन्ही आँखों में थी सपनों की ऊँची उड़ान - प्यारी थी  ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान ​थी हर कदम पर मुश्किले पर दिल को था एहसास, बदलेगी  दु...