उदासी के अंधेरों में, उम्मीद का इक दिया है ज़िंदगी,
शायद किसी की चाहत का, कोई नया सवेरा है ज़िंदगी।
अब तक तो बस काट रहे थे सफ़र तन्हाई का,
तुम जो मिले, तो लगा कि जीने का आसरा है ज़िंदगी।
दिल के सूने आंगन में फिर से आहटें होने लगीं,
तेरी आरज़ू के साए में, अब गुनगुनाती हवा है ज़िंदगी।
माना कि वक़्त ने दिए हैं कुछ गहरे ज़ख़्म मगर,
तेरी मोहब्बत के मरहम से, अब संभल रही है ज़िंदगी।
कांच की तरह बिखरे थे जो ख्वाब कभी गुज़रे कल में,
उन्हें समेट कर फिर नए रंग भरने का हौसला है ज़िंदगी।
अब कोई शिकवा नहीं, न ही कोई उदास ख़ामोशी,
तेरी चाहत की पनाह में, एक मुकम्मल दुआ है ज़िंदगी।