माना नहीं पर एक बार।
झूठा प्यार दिखाया हर बार
सच्चा प्यार न किया एक बार।।
तय किए तेरे लिए जो फासले हजार बार
उन्हीं राहों में न किया इंतजार एक बार।
माना हर बात तुम्हारी
माना न तुमने मगर मेरी एक बात।।
तेरी राहों में फूल नहीं खुद को बिछाया बार -बार
कांटे ही बिछाओ मेरी राहों में तुम भी एक बार।
आते हो सपनों में बार - बार
मिलना न सही पर करो इंतजार बस एक बार।।