Thursday, November 4, 2021

इस तरह दिवाली मनाएं

 किसी रोते को हंसाए, 

इस तरह दिवाली मनाएं

दूर कर गम का अंधेरा,

रोशनी की किरण फैलाए

इस तरह दिवाली मनाएं।

भेदभाव की दीवार गिराए

किसी रूठे को मनाए

इस तरह दिवाली मनाएं

बिछड़ो को पास लाए

छोड़ निराशा आशा का दीप जलाए

इस तरह दिवाली मनाएं

शहीदों की शहादत को नमन कर जाए

एक दिया शहीदों के नाम जलाए

शुद्ध हो प्रकृति सब पेड़ लगाए

पटाखों से नही प्रकृति की माटी से

प्रेम का दीप जलाए

चलो इस तरह दिवाली मनाएं

दिए की रोशनी में रोग निराशा जलाए

फूटे दिलो में बस प्रेम की धार

ऐसे दिवाली मनाएं।
















Friday, October 1, 2021

क्यूं आए हो?

 फिर जो तुम आए हो,

कौन सा गम नया लाए हो?


बातें जो शहद सी मीठी है,

उनमें कौन सा जहर कौन घोल लाए हो?


किस  नूर सी आंखे चमक रही  है?,

चमक में कौन सा अंधेरा छुपाए हो?


साथ रहकर भी जब साथ ना रह पाए,

हो गए जो दूर ,फिर पास क्यों आए हो?


तोड़ कर हर उम्मीद ,

कौन सी उम्मीद लगाए हो?


अब जो आए हो ,

तो क्यूं आए हो?

Sunday, September 12, 2021

उलझन

 उलझ जाओ गर उलझनों में,

तो उलझो नही ,

लड़ जाओ उलझनों से।


माना उलझने उलझाती है ,

पर सच है ,

उलझने हीं नई राह दिखाती है।।


जिंदगी भी सीधी कहाँ  चल पाती है?

हो जाए जो सीधी,

तो जिंदगी खत्म हो जाती है।


सोना भी अस्तित्व का मूल्य चुकाता है,

तप कर आंच में हीं निखार पाता है।।


न ढूँढ हसरत भरी निगाह से मददगार कोई,

सुलझती नही उलझन ,

आ जाती है फिर नई।


प्यार जो खुद से ना कर पाएगा,

मुफ्त में तुझे खैरात, 

क्यों कोई दे जायेगा?


बिखर कर उलझनों से क्या पाएगा?

समेट ले खुद में खुद को,

एक नया राह मिल जाएगा।।

Monday, August 9, 2021

संघर्ष

 बैठे हो क्यों दुनिया से मुंह मोड़ कर।

आएगा पीछे जमाना देख तू खुद को जोड़ कर।।


है पथरीली राहें पर चलना है

तपकर दुख की आंच में ।

कुंदन सा निखरना है

याद कर दुनिया आसान थी कब?


संघर्ष तब भी था जब मां के पेट में था ।

फिर जमाने के बातो से दिल क्यों 

दुखाता है?


जीवन के संघर्ष में जो रुक जाता है।

हकीकत नही बस ,यादें बन जाता है।।


आज है उनकी बारी

गिनाएंगे गलतियां सारी।

सपनो पर विश्वास बनाए रखना

किसने क्या कहा क्या गिनना?


मुश्किलें तो आती है

सबक हर बार नया दे जाती है।

हर सबक से सीख नया,

हारी बाजी जीत के दिखा।।


फिर हिसाब चुकाना उनसे।

मोड़ा था मुंह जिसने तुमसे।।


छोड़ना ना कभी उम्मीद।

लड़कर ही मिलती है जीत।।

Wednesday, August 4, 2021

हम जमाने से नही

 चलती है दुनियां हकीकत से

फसाने से नही।

जमाना है हमसे 

हम जमाने से नही।।


टूट कर जो बिखर जाए

हम हैं वो शीशा नहीं।

मिलता है दर्द अपनो से

बेगाने से नही।।


हारता है इंसान खुद से

हराने से नही।

मिलती है खुशियां एक से 

जमाने से नही।।


जानना है तो मिलो खुद से

जमानें  से नही।

दिल बहलता है दिल से

तराने से नहीं ।।

Saturday, July 31, 2021

तुम नही हो

 है वही सावन, वही बूंदों की फुहार 

बस तुम नही हो।

है गुलशन में ,बहार ही बहार

बस तुम नही हो।।


भाती थी तुम्हे जो चूड़ियां

जो साजो श्रृंगार,

बज रहे हैं आज भी पैरों में

पायल की झंकार,

सब है,बस तुम नही हो।


है आज भी तुम्हारा एहसास

करती हूँ महसूस, हो मेरे पास

यादें हैं,बस तुम नही हो।।


कहा था तुमने ,भींगेंगे सावन में तन मन,

खिल उठेगा जीवन ,जिंदगी होगी मधुबन,

है वही बरसात

बस तुम नही हो।

हर शब्द में था छलावा

रह गया बस पछतावा

मेरा दिल है तेरे  पास,

बस तुम नही हो।।

Friday, July 16, 2021

फादर्स डे

 लिखूं कैसे कुछ शब्दों में 

बहता है जो लहू रगो में।


सिर्फ एक दिन नही अर्पित

है उन पर जीवन समर्पित।।


घर में उनको रुलाते है

तस्वीरों में फादर्स डे मनाते हैं।


जिनके आशिषों  से जीवन मे छाया

सिर्फ एक दिन उनके हिस्से में आया?


पाकर जीवन उनसे इस कदर खो जाते हो,

निकाल उन्हें जीवन से फादर्स डे मनाते हो।


करना है जो कुछ अर्पण,

दिखावा नहीं ,करो समर्पण।।


बैठो उनके पास बिताओ कुछ पल

सेवा से जिनके होता जीवन सफल।

काश

  ​नन्ही आँखों में थी सपनों की ऊँची उड़ान - प्यारी थी  ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान ​थी हर कदम पर मुश्किले पर दिल को था एहसास, बदलेगी  दु...