Saturday, August 24, 2019

देह

नारी हूं पर सिर्फ देह नही
प्यार का सागर हूं पर
विलासिता का साधन नही
नैनो मे बस क्यों देखी मधुशाला
इनमे ही रहती है करूणा की धारा
लबों को छूने की है  बेकरारी
पर  क्यों न सुन पाये
इनकी अनकही कहानी
मंदिरों में नारी के जयकारे लगाते हो
फिर नारी देख मचल क्यों जाते हों?
ऋंगार नही आधार हूं
नजरिया बदल के देखो
भार नही
तुम पर उपकार हूं।




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