Wednesday, November 13, 2019

बचपन

सुबह की हड़बड़ी
रात का सन्नाटा
याद बहुत आता है
बचपन सुहाना
दिन के राजा थे
रातों के शहंशाह
हर खुशी पर
हक था हमारा
है जिंदगी में अब
सब कुछ मगर
ना रहा खुद पर
कोई हक हमारा
याद बहुत आता है
बचपन सुहाना।

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