ना परी ना हूर जैसी
ना शायर की गजल जैसी
ना सूरज का तेज ना चांदनी जैसी
ना सरगम के सुर जैसी
थोड़ी अलबेली थोड़ी पहेली
थोड़ी सी अलग खुद की सहेली
मुश्किलों को पार करती अकेली
क्या कहूं किसके जैसी
मैं बस मेरी जैसी।
नन्ही आँखों में थी सपनों की ऊँची उड़ान - प्यारी थी ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान थी हर कदम पर मुश्किले पर दिल को था एहसास, बदलेगी दु...
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