Sunday, February 14, 2021

फौजी

 कदमों  की आहट से दुश्मन थराए

 देख चेहरे का तेज सूरज भी शीश झुकाए

बांहों में जिनके हिमालय सा दम

रहे देशहित में हरदम

हो राहें पथरीली या समतल

रुके नहीं जिनके कदम

 मौत भी जिनको  डरा ना पाए

कोई बाधा उन्हें क्या रोक पाए?

चट्टानों में भी जो रास्ता बनाएं

कर आसमां से निगरानी देश बचाए

रुकी सी जिंदगी को जो रफ्तार दे  जाए

चीरकर लहरों का सीना

आगे ही बढ़ती भारतीय सेना

मिटा कर खुद की हस्ती लहराते तिरंगा

देकर खून जिगर का बहाते देश प्रेम की गंगा

है धन्य फौजी का जीवन

निछावर करे जो मातृभूमि पर तन मन

है महफूज सरहदें तुमसे

वतन की शान है तुमसे

हो सफल वह जीवन

जब मिले फौजी का तन।







1 comment:

  1. बहुत सुंदर रचना, भारतीय सेना के शौर्य का श्रेष्ठ वर्णन
    महेंद्र अलंकार

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