Saturday, May 1, 2021

कश्मकश

टूटकर चाहा उसे इस कदर की खुद बिखर गई
याद रखा इतना उसे की खुद को भूल गई
आना चाहा पास जितना 
उतना ही दूर हो गई
चाह में जिसकी सब भूल गया
याद रखा उसने सब मगर मुझे ही भूल गया
नजरो से वो है ओझल
याद फिर करता उसे दिल क्यों पल पल
छुड़ा लिया दामन जिससे
मन बचा क्यों ना पाई उससे
फेर लूं जो नजर
नजर आता फिर भी मगर
दिल दिमाग में जंग जारी है किसी ने ना हारने की ठानी है
कश्मकश में है दिल अंजाम बाकी है।

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