हर रोज ख्वाबों में ना आया करो
सारी सारी रात न यूं जगाया करो
खो जाता है चैन-ओ-क़रार
दिल हो जाता है सबसे बेजार
मासूम सा दिल है मेरा
धड़कने यूं न बढ़ाया करो
रहना नहीं जब दिल में मेरे
आंखो में यूं घर न बनाया करो
बढ़ जाती है मदहोशी
छा जाता है खुमार
ख्वाबों में ना यूं प्यार लुटाया करो
कर मुझे इस कदर बेकरार
चैन से सो जाते हो
जब दिल में नहीं मुहब्बत
आंखो में क्यूं दिखाते हो?
जिसकी हर धड़कन पर नाम तुम्हारा
उसी नाम से क्यूं कतराते हो?
देख मुझे यूं परेशान
ऐसे ना मुस्कुराया करो
नाजुक दिल से मेरे यूं खेल न जाया करो
हर रोज ख्वाबों यूं न आया करो।
वाह वाह क्या बात है
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