Sunday, January 16, 2022

गुनाह

 होकर इश्क में फना ये गुनाह कर बैठे

इश्क को इबादत सनम को खुदा मान बैठे


मंजूर है इश्क में हर सजा

ऐलान ये खुले आम कर बैठे।


ना आए वो शिकायत नही 

पलके बिछा इंतजार ताउम्र कर बैठे।


होगा अंजाम ए मुहब्बत क्या ये रब जाने

सैयाद को हम दिल हार बैठे।

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