Tuesday, January 6, 2026

खाकी

 सिर्फ एक रंग नहीं है खाकी रंगों की शान है खाकी।

 जिसे पहन खड़ा हर सिपाही  रहता बलिदान को तैयार है।

  धूप, आंधी, भयंकर मौसम

 सीना तान चलता, पहन खाकी जो चलता है।

  न नींद से यारी,  आराम भी हराम है।

  सीमा हो या गालियां  खाकी हर जगह तैनात है।

   न्याय, कर्त्तव्य साहस का चलता फिरता पाठ है।

   मां की ममता, पत्नी का इंतजार  बच्चों की हंसी छूट जाती,

    पहन के खाकी हर चाहत पीछे रह जाती।

     सलाम है उस खाकी को जो चुपचाप सब सहती है

      हम सो पाते सुरक्षित क्योंकि खाकी  जगती है।।



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