Saturday, May 2, 2026

खामोश बेरुखी

 दिल से तुमको दिल्लगी है, मुझे है दिल का गुमान

  चाहे तुम चाहो न चाहो फिर भी लेंगे तेरा नाम।

   न जाने ये कैसी दीवानगी है या मुहब्बत का जुनून

    तुम न समझ सके तो है ये तेरी समझ का कुसूर।।


      मुझे है तुम्हारी ही चाहत, दिल है तुम्हारे लिए बेकरार

       तुम न आओ फिर भी मगर हम करेंगे इंतजार।

        तन्हाइयों में जो घुट जाए जो दम

         फिर न आवाज देना लौट के न आयेंगे हम।।

    

Monday, April 27, 2026

वक्त का सवाल

 

शाम की दहलीज़ पर ठहरा है एक सवाल,

वक़्त की गर्द में गुम है मेरा ही ख़याल।

अधूरी हसरतों का बोझ उठाए फिरती  हूँ,

सुकून की तलाश में गुज़रा है हर साल।

​मझधार में सिमटी हैं कई अनकही बातें,

पछतावे की धूप है या उम्मीदों की रातें।

बिखरे हुए अक्स को फिर से समेट लूँ,

पर इस टूटे हुए आईने का क़ातिल है कौन।

​थक कर ठहरी है लहर, किनारे की तलाश में,

एक उम्र गुज़ारी है बस, इसी आस में।

मंज़िल की ज़ुस्तज़ू में सफ़र तो कट गया,

अब ये न पूछना कि मेरा हासिल है कौन।

Saturday, April 25, 2026

खामोशी की जुबां

 ​न दिन ढलेगा, न रात होगी, जो यूँ ही नजरें चुराओगे तुम,

मैं चुप खड़ी हूँ तो क्या ये समझे कि सब यूँ ही भूल जाओगे तुम?

​बड़ी अजीब सी हसरत पाले, बैठे हो शाम के पहलू में,

कि बिन कहे मैं समझूँ सब कुछ, और मुस्कुरा के रह जाओगे तुम।

कहा किसने कि बिन ढले सूरज, सुहानी शाम होती है?

बिना लफ्जों के भी क्या मुकम्मल, कोई दास्तान होती है?

​मैं कर रही हूँ जो सब्र अब तक, उसे मेरी रजा न समझो,

शिकायतें जो दबाईं मैंने, उसे महज अदा न समझो।

मेरी खामोशी पुकारती है, कि तुम अब अपनी जुबां खोलो,

उतर के रूह में मेरी, अब तो हाल-ए-दिल अपना बोलो।

​इशारों से अब न काम चलेगा, न ये आँखें अब पढ़नी हैं,

जो दिल में तुमने छुपा रखी हैं, वो बातें अब तो कहनी हैं।

​अजीब जिद है तुम्हारी जानम, कि सब बिना कहे समझ जाऊँ,

मैं चुप हूँ ताकि तुम कहो कुछ, और मैं तुम में ही खो जाऊँ।

Monday, April 6, 2026

तन्हाई

 वादा किया था उसने, पर निभाना भूल गया,

वो अपनी मसरूफियत में आना  भूल गया।

सजी थी महफिलें कल तक जहाँ यादों की,

आज वो शख्स वहां शमा जलाना भूल गया।

भीड़ तो बहुत है इस मतलबी शहर में मगर,

कोई सच्चा रिश्ता यहाँ दिल से बनाना भूल गया।

लिखी थी जो दास्ताँ हमने दिल  की कलम से,

वो वक्त की आंधी में शायद उसे पढ़ना भूल गया।

कहते हैं तन्हाई में ही खुद से मुलाकात होती है,

पर वो आईने में अक्स अपना ही देखना भूल गया।

गिला क्या करें हम मंज़री अपनी किस्मत से यहाँ,

जब कोई अपना ही राह में हाथ थामना भूल गया।

Saturday, April 4, 2026

बहाना

 मुलाकातों को टालने के वो सौ बहाने बनाता है,

नाराज़गी है या हया, बस यही छुपाता है।

कभी कहता है मशरूफियत बहुत है ज़माने की,

कभी थकावट का चेहरा हमें दिखाता है।

वो हाथ छुड़ाकर जो जाने की ज़िद करता है,

जाने क्यों फिर मुड़कर नज़र मिलाता है।

पूछा जो हमने कि याद करते हो हमें?

मुस्कुरा कर वो फिर बात को घुमाता है।

आने का वादा कर मुकर जाता है।

करो शिकायत तो हालात बताता है।

बहाना ही सही, पर ज़िक्र तो है मेरा उसकी ज़ुबाँ पर,

इसी तसल्ली में ये दिल सुकून पाता है।

Friday, April 3, 2026

अनकही ख्वाहिश

 मिले जो साथ तेरा, मैं मुकम्मल हो जाऊं,

तेरी बाँहों में सिमट कर, मुसलसल हो जाऊं।

मेरे सूखे हुए होंठों पे तेरी बातों की मिश्री हो,

तू जो छेड़े मुझे, तो मैं ग़ज़ल हो जाऊं।

दुनिया की नज़रों से छुपा कर रखूँ तुझे ऐसे,

तू मेरा आईना बने और मैं तेरा अक्स हो जाऊं।

बड़ी बेचैन रहती है ये धड़कन तेरे बिन अक्सर,

तू थाम ले जो हाथ, तो मैं पल में बहल जाऊं।

महक उठती है मेरी रूह बस तेरे तसव्वुर से,

तू हकीकत में आए, तो मैं ख़ुशबू बन बिखर जाऊं।

Thursday, April 2, 2026

जिद

 मिले न चैन तुमको भी, ये ऐसी बेकरारी है,

तुम्हें पागल बनाने की अब मेरी जिद जारी है।

मेरी नजरों के घेरे से तुम बचकर जा न पाओगे,

तुम्हारी हर धड़कन पर अब हुकूमत मेरी भारी है।

मैं अपने अक्स को तेरी ही आँखों में सजाऊँगी,

तुझे अपना दीवाना करने की ये मुकम्मल तैयारी है।

खयालों में भी बस मेरी ही सूरत याद आएगी,

मोहब्बत में ये मेरी जीत, और तेरी हार प्यारी है।

मिटा दूँगी वो हर दूरी जो तेरे-मेरे बीच आए,

ये "मन" की जिद है जानम, जो सब पर अब भारी है।

काश

  ​नन्ही आँखों में थी सपनों की ऊँची उड़ान - प्यारी थी  ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान ​थी हर कदम पर मुश्किले पर दिल को था एहसास, बदलेगी  दु...