दिल से तुमको दिल्लगी है, मुझे है दिल का गुमान
चाहे तुम चाहो न चाहो फिर भी लेंगे तेरा नाम।
न जाने ये कैसी दीवानगी है या मुहब्बत का जुनून
तुम न समझ सके तो है ये तेरी समझ का कुसूर।।
मुझे है तुम्हारी ही चाहत, दिल है तुम्हारे लिए बेकरार
तुम न आओ फिर भी मगर हम करेंगे इंतजार।
तन्हाइयों में जो घुट जाए जो दम
फिर न आवाज देना लौट के न आयेंगे हम।।
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