बात बराबरी की तुम्हे खटक क्यों जाती है?
पाया जिनसे जीने का अधिकार
नज़रें उन्हीं पर मचल क्यों जाती है?
हाथ पकड़ कर चलना सीखा जिनसे
नज़रें उन्हें ही क्यों डराती है?
नौ महीने रहकर उनमें
उनकी वेदना समझ क्यों नहीं आती है?
इंसानियत छोड़ना क्या यही
मर्दानगी कहलाती है?
पुरुषत्व उन्मत हुआ
जब महिष रूप में
नारी ने संहार किया दुर्गा रूप में
ये बात कैसे भूल जाती है?
मांगकर शक्ति से शक्ति
बनते हो बलवान
शरम क्यों नहीं आती है?
किस ज्ञान का है अभिमान?
हारकर विद्योतमा से ही
बना कोई कालिदास
लड़की को संस्कार सिखाते हो
लड़के को जैंटलमैन क्यों नहीं बनाते हो?
सौम्यता का रूप है जो
उसे काली क्यों बनाते हो?
नारी से ही है जीवन में खुशियां
सीधी सी बात समझ क्यों नहीं पाते हो?
पाया जिनसे जीने का अधिकार
नज़रें उन्हीं पर मचल क्यों जाती है?
हाथ पकड़ कर चलना सीखा जिनसे
नज़रें उन्हें ही क्यों डराती है?
नौ महीने रहकर उनमें
उनकी वेदना समझ क्यों नहीं आती है?
इंसानियत छोड़ना क्या यही
मर्दानगी कहलाती है?
पुरुषत्व उन्मत हुआ
जब महिष रूप में
नारी ने संहार किया दुर्गा रूप में
ये बात कैसे भूल जाती है?
मांगकर शक्ति से शक्ति
बनते हो बलवान
शरम क्यों नहीं आती है?
किस ज्ञान का है अभिमान?
हारकर विद्योतमा से ही
बना कोई कालिदास
लड़की को संस्कार सिखाते हो
लड़के को जैंटलमैन क्यों नहीं बनाते हो?
सौम्यता का रूप है जो
उसे काली क्यों बनाते हो?
नारी से ही है जीवन में खुशियां
सीधी सी बात समझ क्यों नहीं पाते हो?
ये अभिव्यक्ति गुस्से मे की गयी है...
ReplyDeleteJi aur ye unke liye jo jo ye samajhte hai ki naari kamjor hai
DeleteBaat tikhi par sach hai
नारी कमजोर हो ही नही सकती... ये तो सृजनकर्ता है...
ReplyDeleteसुन्दर भाव
ReplyDelete