Sunday, December 29, 2019

मंजरी

मैं मंजरी हूं
जीवन के आरंभ में हूं
जीवन के अंत में हूं
हर खुशी हर गम हूं
मै मंजरी हूं
जीवन समर्पित इतना
कभी देवों के सर चढ़ी
कभी जीवन को किया विदा
निरंतर खिलना पहचान मेरी
बिन मेरे महफिलों की
 रंगत भी पड़ जाए फीकी
उपासना भी मुझ बिन अधूरी
चाहत नहीं खुद की कोई
सबके चेहरे पर हो मुस्कान
बस इतनी ख्वाहिश मेरी।

No comments:

Post a Comment

काश

  ​नन्ही आँखों में थी सपनों की ऊँची उड़ान - प्यारी थी  ज़िंदगी - लबों पर मुस्कान ​थी हर कदम पर मुश्किले पर दिल को था एहसास, बदलेगी  दु...