मैं मंजरी हूं
जीवन के आरंभ में हूं
जीवन के अंत में हूं
हर खुशी हर गम हूं
मै मंजरी हूं
जीवन समर्पित इतना
कभी देवों के सर चढ़ी
कभी जीवन को किया विदा
निरंतर खिलना पहचान मेरी
बिन मेरे महफिलों की
रंगत भी पड़ जाए फीकी
उपासना भी मुझ बिन अधूरी
चाहत नहीं खुद की कोई
सबके चेहरे पर हो मुस्कान
बस इतनी ख्वाहिश मेरी।
जीवन के आरंभ में हूं
जीवन के अंत में हूं
हर खुशी हर गम हूं
मै मंजरी हूं
जीवन समर्पित इतना
कभी देवों के सर चढ़ी
कभी जीवन को किया विदा
निरंतर खिलना पहचान मेरी
बिन मेरे महफिलों की
रंगत भी पड़ जाए फीकी
उपासना भी मुझ बिन अधूरी
चाहत नहीं खुद की कोई
सबके चेहरे पर हो मुस्कान
बस इतनी ख्वाहिश मेरी।
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